mujhe bhi kuchh kahana hai

Bus yoon hi

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yogeshkumar


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और ये रहा कोकराझार !!

Posted On: 26 Jul, 2012  
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Others न्यूज़ बर्थ पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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गाँधी परिवार के चमचे…

Posted On: 3 Apr, 2012  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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गीत गाया मच्छरों ने…

Posted On: 28 Feb, 2012  
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Others मस्ती मालगाड़ी में

19 Comments

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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महाशय कडुवा सच यही है.. इसके लिए हर बार राजनितिक दलों को दोषी ठहराना भी मुझे समझ नहीं आता.. ये राजनितिक दल भी यहीं के नेता हैं... ऐसा लगता है ये एक धीमी लड़ाई है ... हिन्दुओं के विलुप्तिकरण की... ये सनातन धर्म हज़ारों साल से इस भारत भूमि में है..समय के हिसाब से इसने अनेक थपेड़े झेले हैं मगर अभी समस्या कुछ और ही हो गयी .. सनातन धर्म से असंतुष्ट होकर बहुत से धर्म निकले हैं..जैसे जैन, बौद्ध , और सिख.... मगर किसी धर्म में इस तरह का विद्वेष नहीं पैदा हुआ.. मैंने कभी नहीं सुना कि किसी धर्म ने जबरन धर्म परिवर्तन पर जोर दिया हो.. वास्तव में मैंने नहीं सुना कि दुनिया के किसी और धर्म में जबरन धर्मान्तरण हुआ हो.. अगर अभी आप इन्टरनेट पर बैठे थे आपको अहसास हो जायेगा कि दुनिया के हर धर्मावलम्बियों के साथ इस्लाम का बैर चल रहा है.. अगर हाल ही के कुछ आकडे उठाये जाएँ तो आपको मिलेगा क्या ..गुजरात दंगे, राजस्थान के भारतपुर के दंगे, मथुरा के दंगे, कोलकाता में किया गया उथल पुथल, असम के दंगे, मुंबई में बवाल, आये दिन मुस्लिम आतंक वादियों द्वारा विस्फोट कि घटनाएं, पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों का अपहरण और बलात्कार और हिन्दू परिवारों का भारत में शरण मांगना, यही बात बंगलादेश में भी है (तसलीमा नसरीन कि "लज्जा" पड़कर देखिये) ....अनगिनत घटनाएं, ...अगर इतिहास पर जायें स्थिति और भी बुरी मिलेगी, शायद लोग सुनना न चाहे... मगर इन्सान जो बात नहीं सुनना चाहता, जरूरी नहीं कि वो उस बात से बच जाये !!!! इस्लाम धर्म ग्रहण करने के बाद लोगों की स्थिति में सुधार आया हो या उन्हें मानसिक शांति मिली हो ऐसे भी कोई आकडे उपलब्ध नहीं है.. हमारे सामने पाकिस्तान, बंगलादेश के मुसलमानों कि स्थिति सामने है.. और ज्यादा दूर कि बात नहीं करें तो भारत के मुसलमानों कि स्थिति सामने है जो अपनी खराब स्थिति के आरक्षण पर जोर दे रहे है.. अगर स्थिति को इच्छाशक्ति और पूरे मन के अभी नहीं सम्भाला गया तो ये निश्चय ही आगे आने वाले समय में समस्या बनाने वाला है.

के द्वारा: yogeshkumar yogeshkumar

इनको आप सेकुलर मत बोलिए ...ये हैं छद्म सेकुलर वादी ( Psuedo Secular ) हैं ..अगर ये सच्चे सेकुलर होते तो गोधरा की घटना के बारे में दोनों पक्षों के बारे में बोलते ...राजस्थान में भरतपुर की घटना के बारे में बोलते ... मथुरा में हुई घटना के बारे में बोलते ..और बोलते इस बोडो लैंड में हुई घटना के बारे में... सच से मुहँ छुपा रहे हैं... बिका हुआ मीडिया ...जब असम जल रहा है तो ये दिखा रहे एक चमचा राष्ट्रपति पद की मलाई खा रहा है ....देश की विडम्बना यही है यहाँ उदारता उतनी अधिक है कि भेड़ भी शरमा जाय इनके सामने.... या फिर जयचंद भरे पड़े है यहाँ... जयचंद का हस्र भूल गए .... हम अक्सर वक्त इतिहास में हुई भोलों को लेकर अपने समाज को कोसते रहते हैं... और सोचते रहते हैं काश ऐसा होता ..काश वैसा होता ...मगर ये भूल जाते हैं कि इतिहास हमारे सामने बन रहा है और हम क्या कर रहे हैं??? ये इतिहास ही है... और दिल को जलाएगा ये इतिहास है....

के द्वारा: yogeshkumar yogeshkumar

सेक्युलर ही समस्या की जड है । विडंवना ये है की गद्दार हिंदु भी ईस में शामिल है । बाकी हिंदुओ को अकल नही । ओवर शरिफ बनते है । अपनो को दगा दे कर दुसरों का भला करना है । आप ने ठीक याद दिलाया ये नाम में भूल गया था । राजदीप सरदेसाई । ये और एक गुजराती पत्रकार धिमंत त्रिवेदी । गोधराकांड के पहले से ही नरेन्द्र मोदी के पिछे पडे हुए थे । ये उस समय स्टार न्युज में था । दंगा होते ही ईन दोनो को मौका मिल गया । मुस्लिमो को ढुंढ ढुंढ कर केमेरा के सामने लाने लगे और जैसे गुजरात का राज्यतंत्र ठप्प हो गया हो ऐसे ऐसे बयान लेने लग गए । दोनोंने ही तय कर लिया की मोदी के ईशारे दंगे हो रहे हैं । और सिर्फ मुस्लिमों के बयानों द्वारा बाकी दुनिया को दिखा दिया । और मोदी विरोधियों के हाथमें लड्डु आ गया । ईतने लड्डु की आज तक खाये जा रहे हैं खतम नही होते । और खाने के बाद ऐसी गंदी हवा छोड ते है की नाक में दम आ जाये ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

मोहतरमा धन्यवाद आपका जो आपने पढ़ा .... हर किसी को ये बात समझने की जरूरत है... शांति हर किसी को चाहिए ...मगर हर किसी को सोचना होगा की इस शांति की चाह में वो अपने घर में पड़ा रहे और उदार वादी रुख दिखाता रहे ..ये कुछ करे ... बहुत से लोगों को देखा है भला बना चाहते है वास्तविकता से मुख मोड़ रहे हैं .... सच बात से मुहँ मोड़ रहे हैं....अगर आप घर से निकल मैदान में आकर नहीं लड़ सकते या विरोध नहीं कर सकते तो और भी तरीके हैं सच का साथ देने ... हर किसी को सोचना होगा.. ये असम की आग उसके घर में भी आएगी .... ये कहिये आ रही है ... हमको नहीं तो हमारे बच्चों को जलाएगी..इतिहास गवाह है .. भेड़ के जैसा व्यवहार बंद करना होगा ..तथ्य सामने ..अतीत के.. वर्तमान के ...आभार

के द्वारा: yogeshkumar yogeshkumar

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

स्नेही दिनेश जी नमस्कार, आपके अमूल्य प्रतिक्रिया और मार्गदर्शन के धन्यवाद... मैं आपकी बात से सहमत हूँ... मगर हेमवती नंदन बहुगुणा का कांग्रेस से मोहभंग इंदिरा गाँधी की गलत नीतियों और तानाशाही के चलते 1975 में hi हो गया था... जब इंदिरा गाँधी ने उन्हें UP के मुख्या मंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया... जबकि उस समय इंदिरा गाँधी की तानाशाही चलते देश में कांग्रेस विरोधी माहौल था... और बहुगुणा की लोकप्रियता चरम पर थी... खैर बाद में उन्होंने अलग पार्टी ज्वाइन की... फिर बाद में इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद में कांग्रेस के प्रति एक सहानुभूति लहर पैदा हुई और राजीव ने अपनी माता के पद चिह्नों पर चलते बहुगुणा को राज नैतिक तौर पर कमजोर करने की कोशिश की...और उन्होंने अमिताभ को उनके खिलाफ खड़ा कर दिया...सहानुभूति और अमिताभ के फ़िल्मी glaimar के चलते बहुगुणा चुनाव हार गए .... खैर मेरे कहने का मतलब बस यही है कि जिसने गाँधी परिवार कि चमचा गिरी नहीं कि उसे राजनितिक रूप से हासिये में खड़ा कर दिया जाता है.... मगर जो काम सीनियर बहुगुणा ने नहीं किया वो उनके दोनों बच्चे कर रहे हैं.... अफ़सोस कि बात है..... आपके अमूल्य मार्गदर्शन के bahut धन्यवाद....

के द्वारा: yogeshkumar yogeshkumar

महोदय नमस्कार आपकी सारी बातों से मैं सहमत नहीं हूँ.. जो बातें आपने मेरे ब्लॉग के सन्दर्भ में कही हैं,,, उनसे मैं सहमत हूँ,, मगर जो आपने अपने आपको पिद्दी का शोरबा कहा है.. उससे मैं सहमत नहीं हूँ... ये इसलिए कह रहा हूँ क्यों की मैंने आपके ब्लॉग पढ़े हैं... और मैं खुद आपसे नयी-नयी बातें सीख रहा हूँ,,,, ऐसा लगता है राजनीती में तर्क नाम की कोई चीज़ नहीं सिर्फ निजी स्वार्थ चलता है....खासकर गाँधी परिवार में... ये स्वार्थ के बीज नेहरु के बोये हैं,,, फल इस परिवार द्वारा अभी तक खाए जा रहे हैं,,,, जनता की बेवकूफी और स्वामिभक्त (गुलामी) मानसिकता के चलते......उम्मीद हैं ऐसे ही आगे भी प्रतिक्रिया देते रहेंगे ...धन्यवाद....

के द्वारा: yogeshkumar yogeshkumar

योगेस जी नमस्कार / आपके ब्लॉग पर जे जे के बड़े लोगों ने टिप्पणी की हें में तो उनके सामने पिद्दी न पिद्दी का सोरवा , निशा मित्तल ,दिनेश जी , योग सारस्वत जी सभी जाने माने हें / तो मेने सोचा क्यों न बहती गंगा में मै भी हाथ धो लूँ / लगता है आप हाई कमान यानी गांधी परिवार से काफी नाराज हें / कारण यही की उत्तराखंड पर उसने अपना मुख्य मंत्री सोप दिया /ये ही राजनीती हें / यदि राज करना हें तो राजनेता नहीं टेक्नोक्रेट बिठाओ / जेसे मनमोहन सिंह कोई जनाधार नहीं / कानपुर में यूं पी चुनाव में १००० आदमी भी उनकी सभा नहीं थे * ऐसे ही बहुगुणा जी हें जब चाहो गद्द्दी से उतार दो चूँ तक न करेगें / उनका मुख्यमंत्री बन्ने का ये ही राज हें / और ये ही गांधी परिवार की सफलता का मूल मन्त्र /

के द्वारा: satish3840 satish3840

राहुल गाँधी देश की सेवा में केवल एक ही बड़ा काम कर रहे हैं….वो है अविवाहित रहने का… अगर वो विवाह कर लेते हैं तो सोनिया गाँधी बाद में बोलेंगी या नहीं बोलेंगी कि मूझे पोता दो… उससे पहले ये दस जनपथ के चमचें पीछे पड़ेंगे राहुल गाँधी के… हमें कांग्रेस का नया अध्यक्ष दो….. हा हा हा हा......बहुत सही कहा आपने योगेश जी वंशवाद का जो विष बीज कांग्रेस ने भारतीय राजनीती में लगायी है....वो फल फुल कर इतना बड़ा हो गया है..जिससे भारतीय राजनीती का गला कब का घुट चूका है पर ...भारतीय जनमानस का भी इसमें उतना ही हाथ है क्यों कीं सिचने का काम हमारे बीच रहने वाले ही लोग कर रहे है.... ...अतः दोषी तो जनता भी है...जिसके अंदर अभी भी जाति और स्वामिभक्ति..(गुलामी) का नशा उतरता ही नहीं... बधाई......बहुत अछे लिखते रहे...

के द्वारा: MAHIMA SHREE MAHIMA SHREE




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